🔹 परिभाषा
दो वर्णों के पास-पास आने पर उनमें जो परिवर्तन होता है, उसे संधि कहते हैं।
उदाहरण:
विद्या + आलय = विद्यालय
1️⃣ स्वर संधि
जब दो स्वरों के मिलने से परिवर्तन होता है, तो उसे स्वर संधि कहते हैं।
(क) दीर्घ संधि
जब समान स्वर मिलकर दीर्घ स्वर बनाते हैं।
नियम:
अ + अ = आ
इ + इ = ई
उ + उ = ऊ
उदाहरण:
विद्या + आलय = विद्यालय
रवि + इंद्र = रवींद्र
सु + उक्ति = सूक्ति
(ख) गुण संधि
नियम:
अ/आ + इ/ई = ए
अ/आ + उ/ऊ = ओ
अ/आ + ऋ = अर्
उदाहरण:
नर + इंद्र = नरेंद्र
महा + ईश = महेश
पर + उपकार = परोपकार
महा + ऋषि = महर्षि
(ग) वृद्धि संधि
नियम:
अ/आ + ए/ऐ = ऐ
अ/आ + ओ/औ = औ
उदाहरण:
सदा + एव = सदैव
महा + ऐश्वर्य = महैश्वर्य
वन + औषधि = वनौषधि
(घ) यण संधि
जब इ/ई, उ/ऊ और ऋ के बाद कोई भिन्न स्वर आता है, तो वे क्रमशः य्, व् और र् में बदल जाते हैं।
उदाहरण:
इति + आदि = इत्यादि
सु + आगत = स्वागत
अनु + एषण = अन्वेषण
2️⃣ व्यंजन संधि
जब व्यंजन के साथ स्वर या दूसरे व्यंजन के मिलने से परिवर्तन होता है, उसे व्यंजन संधि कहते हैं।
उदाहरण:
सत् + जन = सज्जन
उत् + हार = उद्धार
दिक् + गज = दिग्गज
वाक् + ईश = वागीश
3️⃣ विसर्ग संधि
जब विसर्ग (ः) के बाद किसी स्वर या व्यंजन के आने पर परिवर्तन होता है, उसे विसर्ग संधि कहते हैं।
उदाहरण:
मनः + हर = मनोहर
यशः + दा = यशोदा
निः + कपट = निष्कपट
दुः + चरित्र = दुश्चरित्र
निः + चल = निश्चल
📝 याद रखने की आसान ट्रिक
संधि के 3 मुख्य प्रकार:
स्वर + स्वर = स्वर संधि
व्यंजन में परिवर्तन = व्यंजन संधि
विसर्ग (ः) में परिवर्तन = विसर्ग संधि
परिभाषा
दो या दो से अधिक शब्दों को मिलाकर कम शब्दों में अधिक अर्थ प्रकट करना समास कहलाता है।
उदाहरण:
राजा का पुत्र = राजपुत्र
समास को अलग-अलग करके लिखना समास-विग्रह कहलाता है।
समास के मुख्य 6 प्रकार
1️⃣ अव्ययीभाव समास
जिस समास में पहला पद प्रधान होता है और पूरा शब्द अव्यय की तरह प्रयोग होता है।
उदाहरण:
यथाशक्ति = शक्ति के अनुसार
प्रतिदिन = प्रत्येक दिन
आजीवन = जीवन-भर
यथासंभव = जैसा संभव हो
2️⃣ तत्पुरुष समास
जिस समास में दूसरा पद प्रधान होता है और दोनों पदों के बीच कारक-चिह्न छिपा होता है।
उदाहरण:
राजपुत्र = राजा का पुत्र
गंगाजल = गंगा का जल
वनवास = वन में वास
देशभक्ति = देश के प्रति भक्ति
तत्पुरुष के मुख्य भेद:
कर्म तत्पुरुष – यशप्राप्त = यश को प्राप्त
करण तत्पुरुष – हस्तलिखित = हाथ से लिखित
संप्रदान तत्पुरुष – देशभक्ति = देश के लिए भक्ति
अपादान तत्पुरुष – धनहीन = धन से हीन
संबंध तत्पुरुष – राजपुत्र = राजा का पुत्र
अधिकरण तत्पुरुष – वनवास = वन में वास
3️⃣ द्वंद्व समास
जिसमें दोनों पद प्रधान होते हैं और उनके बीच और/तथा का भाव होता है।
उदाहरण:
माता-पिता = माता और पिता
दिन-रात = दिन और रात
सुख-दुःख = सुख और दुःख
राम-लक्ष्मण = राम और लक्ष्मण
4️⃣ बहुव्रीहि समास
जिसमें कोई भी पद प्रधान नहीं होता और समस्त पद किसी तीसरे व्यक्ति या वस्तु का बोध कराता है।
उदाहरण:
दशानन = दस हैं आनन जिसके (रावण)
नीलकंठ = नीला है कंठ जिसका (शिव)
लंबोदर = लंबा है उदर जिसका (गणेश)
चतुर्भुज = चार हैं भुजाएँ जिसकी (विष्णु)
5️⃣ कर्मधारय समास
जिसमें एक पद विशेषण और दूसरा विशेष्य होता है।
उदाहरण:
नीलकमल = नीला कमल
महापुरुष = महान पुरुष
कालीमिर्च = काली मिर्च
पीतांबर = पीला अंबर
6️⃣ द्विगु समास
जिस समास का पहला पद संख्यावाचक होता है और पूरे समूह का बोध कराता है।
उदाहरण:
त्रिलोक = तीन लोकों का समूह
पंचवटी = पाँच वटों का समूह
चौराहा = चार राहों का समूह
सप्तर्षि = सात ऋषियों का समूह
🧠 आसान ट्रिक:
अव-तत्-द्वं-बहु-कर्म-द्वि
🔹 उपसर्ग (Prefix)
📖 परिभाषा
जो शब्दांश किसी शब्द के आरंभ में जुड़कर उसके अर्थ में परिवर्तन कर देता है, उसे उपसर्ग कहते हैं।
उदाहरण:
प्र + हार = प्रहार
यहाँ प्र उपसर्ग है।
🔹 प्रत्यय (Suffix)
📖 परिभाषा
जो शब्दांश किसी शब्द के अंत में जुड़कर नया शब्द बनाता है, उसे प्रत्यय कहते हैं।
उदाहरण:
सुंदर + ता = सुंदरता
यहाँ ता प्रत्यय है।
प्रत्यय के मुख्य प्रकार
1️⃣ कृत प्रत्यय
जो प्रत्यय धातु या क्रिया के साथ जुड़ते हैं।
उदाहरण:
पढ़ + अक = पाठक
लिख + अक = लेखक
तैर + आक = तैराक
उड़ + आक = उड़ाकू
2️⃣ तद्धित प्रत्यय
जो प्रत्यय संज्ञा, सर्वनाम या विशेषण के साथ जुड़ते हैं।
उदाहरण:
सुंदर + ता = सुंदरता
अपना + पन = अपनापन
बाल + पन = बालपन
मानव + ता = मानवता
भारत + ईय = भारतीय
🧠 याद रखने की ट्रिक:
शब्द के पहले = उपसर्ग
शब्द के बाद = प्रत्यय
उदाहरण:
👉 अन + पढ़ + ता = अनपढ़ता
अन = उपसर्ग
ता = प्रत्यय
📖 परिभाषा
जिन शब्दों के अर्थ समान या लगभग समान होते हैं, उन्हें पर्यायवाची शब्द कहते हैं।
उदाहरण:
सूर्य — रवि, भानु, आदित्य
📚 महत्वपूर्ण पर्यायवाची शब्द
☀️ सूर्य
रवि, भानु, आदित्य, दिनकर, दिवाकर, भास्कर
🌙 चंद्रमा
चंद्र, शशि, इंदु, सोम, निशाकर, हिमांशु
🌍 पृथ्वी
धरती, धरा, भूमि, वसुंधरा, वसुधा, मही
🌊 समुद्र
सागर, सिंधु, रत्नाकर, जलधि, वारिधि
🌳 पेड़
वृक्ष, तरु, पादप, द्रुम, विटप
💧 पानी
जल, नीर, वारि, तोय, अंबु
🔥 अग्नि
आग, अनल, पावक, वह्नि, हुताशन
🌬️ हवा
वायु, पवन, समीर, अनिल, वात
🏠 घर
गृह, भवन, सदन, आलय, निवास
👩 स्त्री
नारी, महिला, वनिता, रमणी, अबला
👨 पुरुष
नर, मानव, मनुष्य, आदमी
🌸 फूल
पुष्प, सुमन, प्रसून, कुसुम
👁️ आँख
नेत्र, नयन, लोचन, चक्षु, दृग
🐍 साँप
सर्प, नाग, भुजंग, अहि, उरग
🦁 शेर
सिंह, केसरी, मृगराज, वनराज
राजा
नरेश, नृप, भूप, नृपपति, महाराज
जंगल
वन, कानन, अरण्य, विपिन, कान्तार
बादल
मेघ, घन, जलद, पयोद, वारिद
वर्षा
बारिश, वृष्टि, पर्जन्य, बरखा
जिन शब्दों के अर्थ एक-दूसरे के विपरीत होते हैं, उन्हें विलोम शब्द कहते हैं।
जैसे—दिन–रात, सुख–दुःख, लाभ–हानि, सत्य–असत्य, जय–पराजय, जीवन–मृत्यु, नया–पुराना, ज्ञान–अज्ञान, मित्र–शत्रु और प्रकाश–अंधकार।
कुछ और महत्वपूर्ण विलोम शब्द: आदि–अंत, आशा–निराशा, आदर–अनादर, उन्नति–अवनति, निर्माण–विनाश, प्रेम–घृणा, सफलता–असफलता और उचित–अनुचित
अनेकार्थी शब्द वे शब्द होते हैं जिनके एक से अधिक अर्थ होते हैं।
जैसे—कर (हाथ/टैक्स), हार (माला/पराजय), पत्र (चिट्ठी/पत्ता), अंक (संख्या/गोद), आम (फल/सामान्य), कल (बीता हुआ दिन/आने वाला दिन/मशीन), कुल (वंश/योग), गुरु (शिक्षक/भारी), उत्तर (जवाब/उत्तर दिशा), वर (दूल्हा/श्रेष्ठ) और अर्थ (मतलब/धन)।
वाक्य शुद्धि का अर्थ है अशुद्ध वाक्य को व्याकरण के नियमों के अनुसार शुद्ध करना। वाक्यों में लिंग, वचन, काल, कारक, क्रिया, सर्वनाम, विशेषण, वर्तनी और शब्दों के सही प्रयोग का ध्यान रखा जाता है।
जैसे—वह स्कूल जाता है। (शुद्ध), मैंने भोजन खाया। (शुद्ध), राम और श्याम खेल रहे हैं। (शुद्ध), सीता पुस्तक पढ़ रही है। (शुद्ध), बच्चे मैदान में खेल रहे हैं। (शुद्ध), मुझे हिंदी पढ़ना पसंद है। (शुद्ध) और वह समय पर विद्यालय पहुँचा। (शुद्ध)।
वाक्य परिवर्तन का अर्थ है वाक्य का अर्थ बदले उसका रूप बदलना।
इसमें सरल, संयुक्त और मिश्र वाक्यों में परिवर्तन तथा वाच्य, काल, सकारात्मक–नकारात्मक और प्रश्नवाचक वाक्यों का परिवर्तन किया जाता है। जैसे—राम पढ़ता है। → राम अध्ययन करता है।, वह आया और बैठ गया। → वह आकर बैठ गया।, यदि तुम पढ़ोगे, तो सफल होगे। → पढ़ोगे तो सफल होगे।, वह स्कूल जाता है। → क्या वह स्कूल जाता है?, और मैंने काम किया। → काम मेरे द्वारा किया गया।
वाक्य के भेद मुख्यतः तीन होते हैं—
1️⃣सरल वाक्य
सरल वाक्य वह वाक्य होता है जिसमें केवल एक ही उपवाक्य और एक ही मुख्य क्रिया होती है। जैसे—राम विद्यालय जाता है।, सीता पुस्तक पढ़ती है।, मैं प्रतिदिन व्यायाम करता हूँ।, बच्चे मैदान में खेल रहे हैं।
2️⃣ संयुक्त वाक्य
संयुक्त वाक्य वह वाक्य होता है जिसमें दो या दो से अधिक स्वतंत्र उपवाक्य होते हैं, जो और, तथा, लेकिन, अथवा, या आदि समुच्चयबोधक शब्दों से जुड़े होते हैं। जैसे—राम पढ़ता है और श्याम खेलता है।, मैं बाज़ार गया लेकिन दुकान बंद थी।, सीता गाना गाती है तथा कविता भी लिखती है।
3️⃣ मिश्र वाक्य
मिश्र वाक्य वह वाक्य होता है जिसमें एक प्रधान उपवाक्य और एक या अधिक आश्रित उपवाक्य होते हैं। जैसे—जो विद्यार्थी मेहनत करता है, वह सफल होता है।, जब वर्षा होती है, तब किसान प्रसन्न होते हैं।, मैं जानता हूँ कि वह आएगा।, जिसने परिश्रम किया, वही सफल हुआ।
1️⃣ वर्तमान काल (Present Tense)
वर्तमान काल वह काल है जिसमें कार्य वर्तमान समय में हो रहा हो, होता हो या नियमित रूप से होता हो। इसके चार भेद हैं—सामान्य वर्तमान, अपूर्ण वर्तमान, पूर्ण वर्तमान और पूर्ण अपूर्ण वर्तमान। जैसे—राम स्कूल जाता है। (सामान्य वर्तमान), सीता पुस्तक पढ़ रही है। (अपूर्ण वर्तमान), मैं भोजन खा चुका हूँ। (पूर्ण वर्तमान), वह दो घंटे से पढ़ रहा है। (पूर्ण अपूर्ण वर्तमान)
2️⃣ भूतकाल (Past Tense)
भूतकाल वह काल है जिसमें कार्य बीते हुए समय में हुआ हो। इसके चार भेद हैं—सामान्य भूत, आसन्न भूत, पूर्ण भूत और अपूर्ण भूत। जैसे—राम स्कूल गया। (सामान्य भूत), मैं अभी-अभी आया हूँ। (आसन्न भूत), वह पहले ही जा चुका था। (पूर्ण भूत), बच्चे खेल रहे थे। (अपूर्ण भूत)
3️⃣ भविष्यत् काल (Future Tense)
भविष्यत् काल वह काल है जिसमें कार्य आने वाले समय में होगा। इसके दो भेद हैं—सामान्य भविष्यत् और संभाव्य भविष्यत्। जैसे—मैं कल विद्यालय जाऊँगा। (सामान्य भविष्यत्), यदि वर्षा होगी, तो फसल अच्छी होगी। (संभाव्य भविष्यत्), वह परीक्षा में सफल होगा।
1️⃣ कर्तृवाच्य
कर्तृवाच्य वह वाच्य है जिसमें कर्ता (काम करने वाला) प्रधान होता है। इसमें क्रिया का संबंध कर्ता से होता है। जैसे—राम पुस्तक पढ़ता है।, सीता भोजन बनाती है।, बच्चे खेल रहे हैं।, मैं पत्र लिखता हूँ।
2️⃣ कर्मवाच्य
कर्मवाच्य वह वाच्य है जिसमें कर्म (जिस पर कार्य होता है) प्रधान होता है। इसमें क्रिया का संबंध कर्म से होता है। जैसे—पुस्तक राम द्वारा पढ़ी जाती है।, भोजन सीता द्वारा बनाया जाता है।, पत्र मेरे द्वारा लिखा गया।, मैच खिलाड़ियों द्वारा खेला गया।
3️⃣ भाववाच्य
भाववाच्य वह वाच्य है जिसमें कार्य या भाव प्रधान होता है, कर्ता का विशेष महत्व नहीं होता। जैसे—मुझसे चला नहीं जाता।, उससे पढ़ा नहीं जाता।, बच्चों से शोर नहीं किया जाता।, अब अधिक देर तक बैठा नहीं जाता।
लिंग
लिंग वह व्याकरणिक रूप है जिससे संज्ञा या सर्वनाम के पुरुष अथवा स्त्री होने का बोध होता है, उसे लिंग कहते हैं। हिंदी व्याकरण में लिंग के दो भेद होते हैं—पुल्लिंग और स्त्रीलिंग।
1️⃣ पुल्लिंग
जिस संज्ञा से पुरुष जाति का बोध हो, उसे पुल्लिंग कहते हैं। जैसे—लड़का, राजा, पिता, शेर, घोड़ा, शिक्षक, बालक।
2️⃣ स्त्रीलिंग
जिस संज्ञा से स्त्री जाति का बोध हो, उसे स्त्रीलिंग कहते हैं। जैसे—लड़की, रानी, माता, शेरनी, घोड़ी, शिक्षिका, बालिका|
वचन
वचन वह व्याकरणिक रूप है जिससे संज्ञा, सर्वनाम या क्रिया के एक या एक से अधिक होने का बोध होता है, उसे वचन कहते हैं। हिंदी व्याकरण में वचन के दो भेद होते हैं—एकवचन और बहुवचन।
1️⃣ एकवचन
जिस शब्द से एक व्यक्ति, वस्तु या स्थान का बोध हो, उसे एकवचन कहते हैं। जैसे—लड़का, पुस्तक, पेड़, गाय, बच्चा, विद्यालय।
2️⃣ बहुवचन
जिस शब्द से एक से अधिक व्यक्ति, वस्तु या स्थान का बोध हो, उसे बहुवचन कहते हैं। जैसे—लड़के, पुस्तकें, पेड़, गायें, बच्चे, विद्यालय।
कारक
कारक वह व्याकरणिक रूप है जो संज्ञा या सर्वनाम का वाक्य में क्रिया के साथ संबंध बताता है, उसे कारक कहते हैं। हिंदी व्याकरण में कारक के आठ भेद होते हैं।
1️⃣ कर्ता कारक
जो कार्य करने वाले का बोध कराए।
चिह्न: ने
उदाहरण: राम ने भोजन खाया।
2️⃣ कर्म कारक
जिस पर कार्य का प्रभाव पड़ता है।
चिह्न: को
उदाहरण: राम ने सीता को बुलाया।
3️⃣ करण कारक
जिस साधन या माध्यम से कार्य किया जाए।
चिह्न: से, द्वारा
उदाहरण: वह कलम से लिखता है।
4️⃣ संप्रदान कारक
जिसके लिए या जिसे कुछ दिया जाए।
चिह्न: को, के लिए
उदाहरण: उसने गरीबों को भोजन दिया।
5️⃣ अपादान कारक
जिससे अलग होने या दूर होने का बोध हो।
चिह्न: से
उदाहरण: पेड़ से फल गिरा।
6️⃣ संबंध कारक
जो दो संज्ञाओं के संबंध का बोध कराए।
चिह्न: का, के, की
उदाहरण: यह राम की पुस्तक है।
7️⃣ अधिकरण कारक
जिससे स्थान या आधार का बोध हो।
चिह्न: में, पर
उदाहरण: पुस्तक मेज़ पर रखी है।
8️⃣ संबोधन कारक
जिससे किसी को पुकारने या संबोधित करने का बोध हो।
चिह्न: हे!, अरे!, ओ!
उदाहरण: हे मित्र! इधर आओ।
सर्वनाम
सर्वनाम वह शब्द है जो संज्ञा के स्थान पर प्रयोग किया जाता है, उसे सर्वनाम कहते हैं। हिंदी व्याकरण में सर्वनाम के छह भेद होते हैं।
1️⃣ पुरुषवाचक सर्वनाम
जो बोलने वाले, सुनने वाले या जिसके बारे में कहा जा रहा हो उसका बोध कराए।
उदाहरण: मैं, हम, तुम, आप, वह, वे।
2️⃣ निजवाचक सर्वनाम
जो स्वयं या अपनेपन का बोध कराए।
उदाहरण: स्वयं, अपना, अपने, अपनी।
3️⃣ निश्चयवाचक सर्वनाम
जो किसी निश्चित व्यक्ति या वस्तु का बोध कराए।
उदाहरण: यह, वह, यही, वही।
4️⃣ अनिश्चयवाचक सर्वनाम
जो अनिश्चित व्यक्ति या वस्तु का बोध कराए।
उदाहरण: कोई, कुछ, किसी, कहीं।
5️⃣ संबंधवाचक सर्वनाम
जो दो वाक्यों या शब्दों में संबंध स्थापित करे।
उदाहरण: जो, सो, जैसा, वैसा, जितना, उतना।
6️⃣ प्रश्नवाचक सर्वनाम
जो प्रश्न पूछने के लिए प्रयोग किए जाएँ।
उदाहरण: कौन, क्या, किस, किसका, कौन-सा।
विशेषण
विशेषण वह शब्द है जो संज्ञा या सर्वनाम की विशेषता, गुण, संख्या, परिमाण या अवस्था बताता है, उसे विशेषण कहते हैं। हिंदी व्याकरण में विशेषण के चार भेद होते हैं।
1️⃣ गुणवाचक विशेषण
जो गुण, दोष, रंग, आकार या अवस्था बताए।
उदाहरण: अच्छा, सुंदर, ईमानदार, काला, मीठा।
2️⃣ संख्यावाचक विशेषण
जो संख्या या क्रम का बोध कराए।
उदाहरण: एक, दो, पाँच, पहला, दूसरा।
3️⃣ परिमाणवाचक विशेषण
जो मात्रा या परिमाण का बोध कराए।
उदाहरण: थोड़ा, अधिक, कम, पूरा, आधा।
4️⃣ सार्वनामिक विशेषण
जब सर्वनाम किसी संज्ञा की विशेषता बताए, तो उसे सार्वनामिक विशेषण कहते हैं।
उदाहरण: यह पुस्तक, वह लड़का, कोई व्यक्ति, प्रत्येक छात्र।
क्रिया
क्रिया वह शब्द है जिससे किसी कार्य के करने, होने या किसी अवस्था का बोध होता है, उसे क्रिया कहते हैं। हिंदी व्याकरण में क्रिया के दो मुख्य भेद होते हैं—सकर्मक क्रिया और अकर्मक क्रिया।
1️⃣ सकर्मक क्रिया
जिस क्रिया का प्रभाव किसी कर्म पर पड़ता है और जिसका अर्थ कर्म के बिना पूरा नहीं होता, उसे सकर्मक क्रिया कहते हैं।
उदाहरण: राम पुस्तक पढ़ता है।, सीता भोजन बनाती है।, मोहन पत्र लिखता है।
2️⃣ अकर्मक क्रिया
जिस क्रिया में कर्म की आवश्यकता नहीं होती और जिसका अर्थ अपने आप पूरा हो जाता है, उसे अकर्मक क्रिया कहते हैं।
उदाहरण: बच्चा सोता है।, पक्षी उड़ता है।, लड़का हँसता है।, सूर्य उगता है।
अव्यय
अव्यय वह शब्द है जिसके रूप में लिंग, वचन, पुरुष, काल या कारक के अनुसार कोई परिवर्तन नहीं होता, उसे अव्यय कहते हैं। हिंदी व्याकरण में अव्यय के चार मुख्य भेद होते हैं।
1️⃣ क्रियाविशेषण अव्यय
जो क्रिया की विशेषता बताए।
उदाहरण: धीरे, जल्दी, यहाँ, वहाँ, आज, कल।
2️⃣ संबंधबोधक अव्यय
जो दो शब्दों के बीच संबंध बताए।
उदाहरण: में, पर, से, तक, के लिए, के साथ।
3️⃣ समुच्चयबोधक अव्यय
जो दो शब्दों या वाक्यों को जोड़ें।
उदाहरण: और, तथा, लेकिन, अथवा, क्योंकि।
4️⃣ विस्मयादिबोधक अव्यय
जो हर्ष, शोक, आश्चर्य, दुःख आदि भावों को प्रकट करें।
उदाहरण: अरे!, वाह!, हाय!, ओह!, शाबाश!
अलंकार
अलंकार वह साधन है जिससे भाषा की शोभा, सुंदरता और प्रभाव बढ़ता है, उसे अलंकार कहते हैं। 10वीं कक्षा में मुख्य रूप से दो प्रकार के अलंकार पढ़ाए जाते हैं—शब्दालंकार और अर्थालंकार।
1️⃣ शब्दालंकार
जिस अलंकार में शब्दों की सुंदरता या ध्वनि से चमत्कार उत्पन्न होता है, उसे शब्दालंकार कहते हैं।
उदाहरण: चारु चंद्र की चंचल किरणें (अनुप्रास), कनक-कनक ते सौ गुनी (यमक)।
2️⃣ अर्थालंकार
जिस अलंकार में अर्थ की सुंदरता से चमत्कार उत्पन्न होता है, उसे अर्थालंकार कहते हैं।
उदाहरण: उसका मुख चंद्रमा के समान है। (उपमा), वह सिंह है। (रूपक), गंगा पुकार रही है। (मानवीकरण), उसकी आँखों से मोती बरस रहे थे। (अतिशयोक्ति)।
परिभाषा: किसी व्यक्ति, वस्तु, स्थान, प्राणी, पदार्थ, समूह या भाव के नाम को संज्ञा कहते हैं। संज्ञा किसी के नाम, पहचान या अस्तित्व का बोध कराती है। वाक्य में जिस व्यक्ति, वस्तु, स्थान या भाव के बारे में बात की जाती है, उसका नाम संज्ञा हो सकता है।
उदाहरण: राम विद्यालय गया। दिल्ली भारत की राजधानी है। पुस्तक मेज पर रखी है। गाय घास खाती है। सोना एक मूल्यवान धातु है। ईमानदारी एक अच्छा गुण है। यहाँ राम, दिल्ली, पुस्तक, गाय, सोना और ईमानदारी संज्ञा शब्द हैं।
संज्ञा के मुख्य भेद:
व्यक्तिवाचक संज्ञा — राम, सीता, भारत।
जातिवाचक संज्ञा — लड़का, पक्षी, नदी।
भाववाचक संज्ञा — प्रेम, ईमानदारी, बचपन।
द्रव्यवाचक संज्ञा — सोना, पानी, दूध।
समूहवाचक संज्ञा — सेना, झुंड, वर्ग।
परिभाषा: जो शब्द क्रिया की विशेषता बताते हैं, उन्हें क्रियाविशेषण कहते हैं। ये बताते हैं कि कोई काम कैसे, कब, कहाँ या कितनी मात्रा में हुआ।
उदाहरण: राम धीरे चलता है। यहाँ धीरे बताता है कि राम कैसे चलता है। सीता आज विद्यालय गई। यहाँ आज बताता है कि सीता कब गई। बच्चे बाहर खेल रहे हैं। यहाँ बाहर बताता है कि बच्चे कहाँ खेल रहे हैं। वह बहुत तेज दौड़ता है। यहाँ बहुत क्रिया की मात्रा बताता है।
क्रियाविशेषण के मुख्य भेद:
रीतिवाचक: धीरे, जल्दी, अच्छी तरह।
कालवाचक: आज, कल, अभी, पहले।
स्थानवाचक: यहाँ, वहाँ, बाहर, अंदर।
परिमाणवाचक: बहुत, कम, अधिक, थोड़ा।